preloader

about us

'सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया'।

प्रज्ञा समिति प्रज्ञ जनों की एक ऐसी समिति है जो भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के उत्थान के लिए पिछले 5 दशकों से भी ज्यादा समय से प्रयत्नशील है। इसका गठन आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व बिहार के सुसंस्कृत महापुरुषों के सम्मिलित विचार से उद्भूत विचारों को आधार बनाकर किया गया था। यह वह काल था जब स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बिहार में जातीय उन्माद का जहर फैल रहा था एवं प्रज्ञ समाज इसका शिकार हो रहा था। अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के निवारण के लिए बिहार के प्रबुद्ध प्रज्ञ जनों ने इसकी स्थापना का बीज रोपण किया था। हमें याद है कि उस समय प्रज्ञा समाज में इस समिति की स्थापना का शानदार स्वागत किया गया था और इसके संस्थापकों को समाज में अति आदर का स्थान प्राप्त हुआ था।

समय के साथ-साथ कोई लिखित साक्ष्य मेरी जानकारी में उपलब्ध नहीं है जिससे हम समिति की स्थापना, उद्देश्य आदि का लिखित साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें। बस इतना याद है की पटना के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्रांगण में महाकवि केदारनाथ मिश्र प्रभात, विद्य्वत वर आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा आदि विद्वान इसके अग्रगण्य नेताओं में परिगण्य हुए थे। उस समय जातीय संस्था के रूप में इसके प्रति इसके विरोधी संस्थाओं द्वारा दुष्प्रचार किया जाता रहा और इसके सिद्धांतों और उद्देश्यों का दुष्प्रचार और उपहास होता रहा परंतु प्रज्ञा समाज के महान नेताओं ने इसकी परवाह नहीं करते हुए स्वच्छंद रूप से अपने सिद्धांतों का प्रचार करना शुरू कर दिया था और अंततः 1971 में इसे कानूनी वैधता प्राप्त हो गई।

इसका बिहार सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1960 के तहत 1971 में निबंधन हुआ। इस संस्था की पवित्रता और उद्देश्य कमनियता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 60-65 की कालावधि में ही विप्र समाज द्वारा अपने समाज के उत्थान के लिए अग्रगामी संस्था के रूप में इसे स्वीकार कर लिया गया था। इसका एक उदाहरण इस बात को स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त होगा। मुझे याद है कि हम सरकारी नौकर थे और सरकारी सेवा में रहे लोगों के लिए प्रज्ञा समिति से किसी तरह का संबंध होना सरकार विरोधी कार्य माना जाता था परंतु, वे लोग सरकार की कुदृष्टि के बावजूद इस संस्था से जुड़ते गए थे। भागलपुर के निवासी और पटना उच्च न्यायालय के एडवोकेट महेंद्र प्रसाद पांडे ने बहुत गौरव के साथ मुझे कहा था कि मैं प्रज्ञा समिति का महासचिव हूं। उन पर यह बंधेज लागू नहीं होता था कि वह सरकारी नौकर हैं इसलिए अगर वे प्रज्ञा समिति के सदस्य होंगे तो उन पर सरकार की कुदृष्टि नहीं पड़ेगी। इस तरह सरकारी सेवा (पुलिस) में रहते हुए भी महाकवि केदारनाथ मिश्र प्रभात जैसे निर्भीक प्रज्ञ अनुयायीयों ने प्रज्ञा समिति के सिद्धांतों का निर्भीक भाव से अनुगमन करना शुरू किया।

client
client
client
client
client
client
Send Email
Email Address

info@pragyasamiti.in

info@pragyasamiti.in

Call Us Now
Phone Number

0612-2263083

9430253666

Find Us Here
Location

सम्पादकीय कार्यालय
'लीलाधाम', 3/307, न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी,

पटना 800013